सब्जी की खेती से कमाते हैं 6 से ₹7 लाख सालाना और बहुत से किसानों को दिया रोजगार जानिए गरीब की कहानी

Success story of a poor man who become a rich by vegetable farming: नमस्कार किसान भाइयों आज मैं एक ऐसे किसान की सफलता की कहानी लेकर आया हूं जो पहले बहुत ही गरीब था लेकिन उसने एक सही तरीके से फार्मिंग स्टार्ट की जहां से वह आज के समय में ₹700000 सालाना कमा रहे हैं दोस्तों आपको बता दूं कि राकेश कुमार नालंदा जिले के रहने वाले हैं जहां पर वह एक हेक्टेयर में 1088 क्विंटल आलू उगाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं इसी के साथ-सथ वह अपने आसपास के किसानों को अपने यहां काम देकर उनकी आर्थिक स्थिति में मदद भी कर रहे हैं

बात आज से करीब 15 साल पहले की है बिहार राज्य के नालंदा जिले के शरीफ ब्लॉक के सोहडीह गांव में किसान परंपरागत गेहूं और धान की खेती करते थे लेकिन अगर आप एक पढ़े-लिखे किसान है तो आपको पता होगा गेहूं और धान की खेती में ज्यादा मुनाफा नहीं होता है इसलिए राकेश कुमार ने गेहूं और धान की खेती की जगह उन्होंने सब्जी की खेती करना शुरू किया और सालाना लाखों रुपया कमाने लगे यह देखकर आसपास के 10 से 12 गांव के किसान उनकी सफलता से बहुत प्रभावित हुए और वह लोग भी सब्जियों की खेती करने लगे और बहुत ही अच्छा पैसा कमा रहे हैं

सफलता की कहानी सब्जी किसान राकेश कुमार की

जब राकेश कुमार से एक इंटरव्यू में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि एक समय पर इतनी गरीबी थी कि खाने तक के पैसे नहीं हुआ करते थे तब मैंने एक छोटी सी जमीन में सब्जियों की खेती करना शुरू किया लेकिन किस्मत मेरी मां से पलटना स्टार्ट हो गई तब खाने तक के पैसे नहीं थे लेकिन आज के समय में पैसों की कोई कमी नहीं है आज के समय में मैं 3 एकड़ की जमीन में खेती करता हूं और बहुत सारे किसान मेरे सब्जियों के खेत में मेरे लिए काम करते हैं और उनकी देखरेख करते हैं आज के समय में मैं साल का 600000 से लेकर ₹700000 बहुत आराम से कमा लेता हूं success story of vegetable farmer

सब्जियों की खेती के दम पर दिलाई अपने गांव को अलग पहचान

बिहार के नालंदा जिला के सोहडीह गांव के राकेश कुमार अपनी सक्सेस का की कहानी में कहते हैं कि वह जो सब्जियां उगाते हैं वह बिहार के लगभग सभी जिलों में पहुंचाई जाती हैं और उन्होंने कहा कि आज के समय में मैं अब सब्जियों के दम पर अपने गांव का नाम बहुत ही ऊंचा कर रहा हूं इसके साथ सब्जियों की खेती की बदौलत आज मैं बहुत सारे पुरस्कार भी जीत चुका हूं उन्होंने कहा कि मैं एक हेक्टेयर में 1088 क्विंटल आलू गाता हूं और उसी के साथ-साथ एक हेक्टेयर में प्याज 660 क्विंटल प्याज उगाता हूं जिनके लिए इनको बहुत सारे पुरस्कार भी मिल चुके हैं क्योंकि यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है

सब्जी की खेती से पुरी जिंदगी कैसे बदली

राकेश कुमार ने न्यूज़ चैनल्स को बताया कि उन्होंने पहली बार एक छोटी सी जमीन में उन्होंने कद्दू गाया था और यह चीज की शुरुआत 2009 में हुई जब 2009 में वह नूरसराय महाविद्यालय में उन्हें कद्दू के बीज मिले और वहां पर उन्हें बताया गया कद्दू की खेती कैसे की जाती है उन्होंने बताया कि वह फसल को करने के बाद उन्हें लगभग ₹2000 का मुनाफा हुआ और उसके बाद से उन्होंने गेहूं धान की खेती करना छोड़ दिया आज के समय में वह 6 से ₹700000 आराम से 1 साल में कमा लेते हैं

राकेश कुमार कहते हैं कि अगर किसान आपस में मिलजुल कर खेती करें तो इससे ज्यादा मुनाफा होता है क्योंकि किसानों को पता होता है कि कब किस फसल को पानी चाहिए और किस-किस नाशक का प्रयोग करके कीड़ों को मारना है उन्होंने बताया कि वह अपने गांव के साथ साथ लोहड़ी, बड़ी पहाड़ी,सलीमपुर, इब्राहिमपुर, हेमंतपुर, कखड़ा गांव और बहुत सारे ऐसे गांव हैं जो हमारी खेती करने के तकनीकी को समझ कर वह भी आज बहुत ही अच्छा पैसा कमा रहे हैं इस तरीके से खेती करके

उन्होंने बताया कि वह करीब 1 एकड़ एरिया में सब्जी की खेती करते हैं और करीब रोज दो से तीन गाड़ी सब्जियां बाजार में बेचने के लिए भेजते हैं इसी के साथ उन्होंने बताया कि वह अपनी एक बेटे को कोटा में और दूसरी बेटी को पटना में पढ़ा रहे हैं उन्होंने यह भी कहा कि इन लोगों की पढ़ाई में बहुत पैसा खत्म हो रहा है करीब 20,000 से ज्यादा वह अपने बच्चों की पढ़ाई पर सिर्फ खत्म कर देते हैं अगर यह आज मुमकिन हो पाया है तो सिर्फ सब्जियों की खेती की बदौलत

सब्जी की वजह से मैंने लिए नई नई चीजें

उन्होंने बताया कि सब्जी की खेती करके शुरुआत में मेरे पास ज्यादा जमीन नहीं थी तो कुछ जमीने मैंने लीज पर ली और कुछ जमीनों को मैंने खरीद लिया इसके साथ मैंने नया घर बनवाया और गाड़ी खरीदी और अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए हमारे भारत देश के सबसे अच्छे प्रसिद्ध शिक्षक स्थलों पर भेजा हूं जहां पर उनकी शिक्षा में प्रति महीने का ₹20000 का खर्चा आता है

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