बस किसान एक काम करो फसल में पैदावार 5 गुना ज्यादा होगी

आमतौर पर देखने के लिए मिलता है किसान खेत में खेती करने के लिए बहुत मेहनत करते हैं हर एक चीज सही समय पर डालते हैं जो खेत को जरूरत होती है फिर भी फसल अच्छी नहीं होती है इसके पीछे निम्नलिखित कारण हो सकते हैं जैसे कि जलवायु का सही ना होना खेत की मिट्टी का सही नहीं होना सही समय पर अच्छे उर्वरकों का उपयोग ना करना आइए हम जानेंगे इस पोस्ट में कि कैसे आप अपने फसल की पैदावार बढ़ा सकते हैं और अच्छा वहां से पैसा कमा सकते हैं खेती करना जितना जरूरी है उतना ही जरूरी यह भी सीखना है कि आखिर खेत का पैदावार कैसे बढ़ाया जाता है

धान का पैदावार बढ़ाने के तरीके

आमतौर पर धान की पैदावार किसी एक चीज पर निर्भर नहीं करती है अगर आप धान की पैदावार बढ़ाना चाहते हैं तो आपको मुख्य रूप से कई चीजों के ऊपर काम करना पड़ेगा जैसे सही समय पर पानी देना अपनी मिट्टी पर सही समय पर खाद्य पदार्थों का उपयोग करना इसके साथ अपने धान की खेती को घास से बचाना और कई निम्नलिखित रुप से तरीके बताए गए हैं जिन पर आपको मुख्य रूप से ध्यान देना है अपनी धान की पैदावार बढ़ाने के लिए

  • सही जगह का चयन: धान की उचित पैदावार के लिए एक उपयुक्त जगह का चयन करें। धान के लिए मिट्टी की उचित गुणवत्ता, पानी की सुप्लाई, सुरज की रोशनी का प्राप्त करने का अच्छा संभावना होना चाहिए।
  • उचित बीजों का चयन: उचित धान की विकसित हाइब्रिड या प्रोग्राम बीजों का चयन करें, जो आपके क्षेत्र में मौसमिक परिस्थितियों के लिए उपयुक्त हों। कृषि विशेषज्ञों द्वारा सिफारिशित बीजों का उपयोग करना उपयुक्त हो सकता है।
  • उचित रोपण: धान को सही तारीके से रोपित करने में सुनिश्चित करें। अच्छी रोपण प्रथा के माध्यम से, साइकिलोन रोपण या मशीनी रोपण का उपयोग करें। रोपण के दौरान बीज की गहनता और नियमितता का ध्यान रखें।
  • समयबद्ध खाद प्रबंधन: धान के लिए उचित मात्रा में खाद और पानी प्रदान करने के लिए सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करें। खेती के लिए मिट्टी का परीक्षण करें और उसे आधार बनाकर खाद की उचित मात्रा निर्धारित करें।
  • पानी प्रबंधन: धान की पैदावार को बढ़ाने के लिए उचित जल प्रबंधन आवश्यक होता है। धान के लिए सुरक्षित और नियमित पानी की आपूर्ति को सुनिश्चित करें। सिंचाई के लिए उपयुक्त तकनीकों जैसे कि सुबमर्सिबल पंप, स्प्रिंकलर या ट्रिकल सिंचाई का उपयोग करें।
  • रोग और कीटनाशक प्रबंधन: धान के रोगों और कीटों से बचाव और नियंत्रण के लिए उचित प्रबंधन करें। उचित रोगनाशक और कीटनाशक का उपयोग करें और फसल की समयबद्ध सुरक्षा को सुनिश्चित करें।
  • खेती की नियमित देखभाल: धान की नियमित देखभाल करें, जैसे कि उचित विरोधी वातावरण के लिए खेती की जमीन को साफ और सुरमिया रखें, फसल की नियमित जांच करें और उचित उच्चाहार व प्रतिस्थापन की व्यवस्था करें।

धान को पीले रोग से कैसे बचाएं

वैसे तो देखा जाता है कि धान में कई प्रकार के रोग लगते हैं लेकिन इसमें से धान को पीला कर देने वाला रोग बहुत ही ज्यादा धान की फसल के लिए खराब होता है यह फसल को पीला कर देता है और उपज को बहुत कम कर देता है इसलिए अब हम जानेंगे कि कैसे आप इस धान के पी ले कर देने वाले रोग से अपनी खेती को बचा सकते हैं इसके कई तरीके हो सकते हैं जो निम्नलिखित नीचे आपको बताए गए हैं

  1. उचित बीज चुनें: धान के लिए सुरक्षित और पीले रोग के प्रति प्रतिरोधी बीजों का चयन करें। बीज उत्पादकों द्वारा सलाह दी गई उचित जाति के बीजों का उपयोग करें।
  2. संगठित रोग प्रबंधन: खेत में धान के रोगों के प्रति संगठित रोग प्रबंधन कार्यक्रम को अपनाएं। इसमें नियमित जांच, बालाई नियंत्रण, रोग प्रतिरोधी बीजों का उपयोग, रोगनाशकों का उचित उपयोग और प्रकृतिगत संगठन शामिल हो सकते हैं।
  3. स्वच्छ बीज और स्थानीय स्रोतों का प्रयोग: पीले रोग से प्रभावित बीजों का उपयोग न करें। स्थानीय बीज या सत्यापित स्रोतों से विश्वसनीय बीजों का प्रयोग करें।
  4. समयबद्ध पौधशोषण: धान को उचित खादों से पौधशोषण करें। स्थानीय मापदंडों के अनुसार जैविक खाद, कम्पोस्ट, गोबर या उर्वरक का उपयोग करें।
  5. उचित जल प्रबंधन: धान की सही सिंचाई की व्यवस्था करें। अधिक पानी से बचें, क्योंकि अधिक नमी रोगों के विकास को बढ़ा सकती है।
  6. सुरक्षित फसल प्रबंधन: पीले रोग से प्रभावित पौधों को तुरंत हटा दें और उचित फसल प्रबंधन अभियान का पालन करें। इसमें फसल के दौरान नियमित जांच, अनुसरण, और फसल की नियमित देखभाल शामिल हो सकती है।
  7. अनुसंधान और सलाह: स्थानीय कृषि विभाग, कृषि विशेषज्ञों, और कृषि अनुसंधान संगठनों के साथ सहयोग करें और उनसे नवीनतम प्रविष्टियों और सलाह की जानकारी प्राप्त करें।

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